poetry
उर्दू भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए भारत-श्रीलंका के बीच साहित्यिक समझौता
चारमीनार एजुकेशनल ट्रस्ट और सबोधी श्रीलंका की ओर से साहित्यिक सम्मेलन व मुशायरा – प्रोफेसर…
जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़ब्ह होती हो , जहाँ तज़लील है जीना वहाँ बेहतर है मर जाना ।।
लेखक: हाफिज़ किदवई यही तो अल्फ़ाज़ रह गए जो अब कानो में गूजेंगे । मनहूस…
बोल के लब आज़ाद हैं तेरे …बोल जवां अब तक तेरी है ….!!!
जब देश में राजनितिक इमरजेंसी लगी हो , विरोध के स्वर नहीं सुने जारहे हैं…
दस्तूर – जब सरकार नागरिकों के लिए नहीं अपने एजेंडा पर काम करने लगे तो नागरिकों को क्या करना चाहिए?
वंचितों और अनदेखे लोगों के अपने वजूद को वचाने की अनूठी दास्तान , आप भी…