स्वच्छता केवल सरकार का काम नहीं, यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है।

गीतेश कौशल, दतिया।
दतिया मध्यप्रदेश का एक ऐतिहासिक जिला है, जिसकी पहचान अब तक किले, मंदिरों और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी रही है। लेकिन हाल के वर्षों में यह शहर स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी की दिशा में भी चर्चा में आने लगा है। यह बदलाव अचानक नहीं, बल्कि लगातार प्रयासों का परिणाम है। हाल ही में कलेक्टर स्वप्निल वानखडे और पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार वर्मा का साइकिल से किया गया निरीक्षण इसी परिवर्तन की झलक है। यह कदम केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि साफ संदेश था कि “स्वच्छता केवल सरकार का काम नहीं, यह हम सबकी जिम्मेदारी है।”

साइकिल पर निरीक्षण, एक नई मिसाल।

राजगढ़ चौराहा, मुड़ियन का कुआं, टाउन हॉल, पटवा तिराहा, सब्ज़ी मंडी और किला चौक। ये वे स्थान हैं जहाँ रोज़ हजारों लोग आते-जाते हैं और स्वच्छता की असली चुनौती भी यहीं दिखती है। अधिकारियों का साइकिल से भ्रमण करना प्रतीकात्मक जरूर था, लेकिन इसका असर गहरा पड़ा। यह कदम सीधे तौर पर स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की उस सोच से जुड़ता है जिसमें अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद आगे आकर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। जब अधिकारी गाड़ियों के काफ़िले की जगह साइकिल पर निकलते हैं, तो यह जनता को बताता है कि प्रशासन केवल आदेश देने वाला नहीं बल्कि बदलाव का साथी है।

आमजन से संवाद, जागरूकता की पहली सीढ़ी।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने आम नागरिकों से संवाद किया। उनसे कहा गया कि वे सड़कों पर कचरा न फेंकें और सफाई व्यवस्था में सहयोग करें। सड़क किनारे फल-सब्ज़ी बेचने वालों को विशेष रूप से समझाया गया कि वे प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ उठाकर अधिकृत सब्ज़ी मंडियों और हॉकिंग ज़ोन में व्यवसाय करें।

सब्ज़ी बेचने वाले रमेश ने कहा कि “अगर मंडी में बैठने की व्यवस्था होगी और पुलिस हमें परेशान नहीं करेगी तो हमें भी अच्छा लगेगा। ग्राहक भी आराम से खरीददारी करेंगे और सड़कें भी साफ रहेंगी।”

वहीं, कॉलेज की छात्रा सीमा ने अपनी चिंता जताई कि “कई बार स्कूल आते-जाते हमें कचरे के ढेर से गुजरना पड़ता है। अगर प्रशासन और लोग दोनों ध्यान देंगे तो दतिया वाकई साफ हो सकता है।”

अधिकारियों को निर्देश।

कलेक्टर ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क पर कचरा फेंकने वालों को पहले चेतावनी दी जाए और बार-बार गलती करने पर जुर्माना लगाया जाए। यह कदम स्वच्छ सर्वेक्षण में दतिया की रैंकिंग सुधारने की दृष्टि से भी अहम है। इस सर्वेक्षण में नागरिक अनुशासन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन जैसी बातें शामिल होती हैं।

नगरपालिका कर्मचारी राजकुमार का कहना है। कि “हम रोज़ सफाई करते हैं, लेकिन लोग दोबारा गंदगी फैला देते हैं। अगर जुर्माना लगेगा तो लोग भी जिम्मेदार बनेंगे।”

नागरिक जिम्मेदारी और साझेदारी।

सरकारी योजनाएँ दिशा दिखा सकती हैं, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब नागरिक भी अपनी आदतें बदलेंगे। एक ओर स्वच्छ भारत मिशन लोगों को डस्टबिन और शौचालय की सुविधा देता है, तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना रेहड़ी-पटरी वालों को व्यवस्थित बाज़ारों में स्थान दिलाने का अवसर देती है। लेकिन इन योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर है कि लोग इन्हें कितनी गंभीरता से अपनाते हैं।

किला चौक पर चाय बेचने वाले श्यामलाल कहते हैं कि “अगर शहर साफ रहेगा तो ग्राहक भी ज़्यादा आएंगे। सफाई सबके लिए फायदेमंद है।”

स्थानीय चुनौतियाँ: क्यों कठिन है दतिया में सफाई?

दतिया, छोटे आकार के बावजूद, तेजी से बढ़ती आबादी और बाज़ार की अव्यवस्था से जूझ रहा है।

  • संकरी गलियाँ और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र सफाई को मुश्किल बना देते हैं।
  • कचरा डंप करने की आदतें अभी तक नहीं बदली हैं।
  • रेहड़ी-पटरी वाले अक्सर मुख्य सड़कों पर बैठ जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और गंदगी भी फैलती है।

इन चुनौतियों के बीच प्रशासन की पहल तभी सफल हो सकती है जब नागरिक जागरूक और अनुशासित रहें।

स्वच्छ भारत से स्वच्छ सर्वेक्षण तक।

2014 में शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन का मकसद केवल खुले में शौच से मुक्ति पाना नहीं था, बल्कि शहरी इलाकों को व्यवस्थित, स्वच्छ और टिकाऊ बनाना भी है। आज यह मिशन स्वच्छ सर्वेक्षण के जरिए हर शहर और कस्बे को प्रतियोगिता की भावना से जोड़ता है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलता है। दतिया प्रशासन की यह पहल भी इसी बड़े परिप्रेक्ष्य का हिस्सा है। अगर नागरिक सहयोग करें तो यह शहर न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में एक आदर्श बन सकता है।

दतिया का संदेश।

दतिया प्रशासन का यह कदम केवल सफाई व्यवस्था सुधारने का नहीं, बल्कि नागरिकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास दिलाने का प्रयास है। यह दिखाता है कि जब अधिकारी और जनता साथ मिलकर चलें, तो कोई भी शहर स्वच्छता की नई पहचान बना सकता है। यही दिशा स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना जैसे कार्यक्रमों की भी है।

आपकी बारी।

दतिया की यह पहल हमें याद दिलाती है कि बदलाव सरकार या प्रशासन अकेले नहीं ला सकता। यह तभी संभव है जब हम सब मिलकर अपने शहर को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी उठाएँ।

आप अपने मोहल्ले या शहर की स्वच्छता के लिए क्या कर रहे हैं?
क्या आपने कभी कचरे की समस्या पर प्रशासन से बात की है?
क्या आप अपने घर या दुकान से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग करके देते हैं?

💬 हमें लहर हिंदी के कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताइए। आपकी छोटी-सी आदत भी किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है।