हरियाणा की बेटियों के हाथों में आत्मनिर्भरता की चाबी

लेख: लहर हिंदी ब्लॉग टीम

हरियाणा की मिट्टी में जब भी कोई नई पहल शुरू होती है, तो उसमें महिलाओं की भूमिका केंद्र में होती है।
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने हाल ही में “दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना (Deen Dayal Lado Lakshmi Yojana – DDLLY)” की शुरुआत की है — यह एक ऐसी योजना जो महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव लाने का सपना देखती है।

योजना की झलक।

यह योजना हरियाणा सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत राज्य की 23 वर्ष से अधिक आयु की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को ₹2,100 की मासिक वित्तीय सहायता दी जाएगी।
यह राशि सीधे महिला के बैंक खाते में जमा होगी — यानी न बिचौलिया, न झंझट।

सरकार का उद्देश्य साफ है — “हर महिला अपने खर्चों को खुद संभाल सके, आत्मविश्वास के साथ जीवन जी सके और समाज में बराबरी से भागीदारी निभा सके।”

क्यों खास है लाडो लक्ष्मी योजना?

  • आर्थिक आज़ादी: हर महीने मिलने वाली राशि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का आधार बनेगी।
  • सामाजिक सुरक्षा: कमजोर वर्ग की महिलाओं को एक स्थायी सहारा मिलेगा।
  • सम्मान और आत्मविश्वास: आर्थिक सहयोग के साथ-साथ यह योजना महिलाओं को समाज में गरिमा से जीने का अवसर देती है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने योजना की घोषणा करते हुए कहा था। कि “लाडो लक्ष्मी योजना हमारी माताओं और बहनों के आर्थिक सम्मान का प्रतीक है। यह सिर्फ वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण का आंदोलन है।”

कौन उठा सकता है लाभ?

पात्रताविवरण
आयु सीमा23 वर्ष या उससे अधिक
आय सीमापरिवार की वार्षिक आय ₹1 लाख से कम
निवासहरियाणा में 15 वर्ष से अधिक समय से निवास
वैवाहिक स्थितिविवाहित और अविवाहित दोनों पात्र
सहायता राशि₹2,100 प्रतिमाह (DBT के माध्यम से)

जो महिलाएं पहले से वृद्धावस्था पेंशन, विधवा सहायता, विकलांग सहायता जैसी योजनाओं का लाभ ले रही हैं, वे इस योजना में शामिल नहीं होंगी।
हालाँकि, गंभीर बीमारियों (जैसे कैंसर या हीमोफीलिया) से पीड़ित महिलाओं को छूट दी गई है।

आवेदन की नई डिजिटल राह।

महिलाएं इस योजना के लिए “लाडो लक्ष्मी ऐप” के ज़रिए आवेदन कर सकती हैं — जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।

आवेदन करते समय आवश्यक दस्तावेज़:

  • आधार कार्ड
  • परिवार पहचान पत्र (PPP)
  • निवास प्रमाण
  • बैंक पासबुक
  • आय प्रमाण पत्र

पंजीकरण की प्रक्रिया सरल है, और सरकार ने सुनिश्चित किया है कि आवेदन की जांच और सहायता वितरण में पारदर्शिता बनी रहे।

आंकड़े बोलते हैं।

  • योजना की घोषणा के पहले 6 दिनों में 1.71 लाख से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया।
  • अनुमान है कि पहले चरण में लगभग 20 लाख महिलाएं इस योजना से लाभान्वित होंगी।
  • योजना के लिए सरकार ने ₹5,000 करोड़ का बजट तय किया है।
  • 1 नवंबर 2025 से पात्र महिलाओं के खातों में पहली राशि जमा होना शुरू होगी।

महिलाओं की आवाज़।

रेवाड़ी की सुनीता देवी, जो घरेलू कामगार हैं, कहती हैं। कि “हर महीने ₹2,100 मिल जाएंगे तो बच्चों की स्कूल फीस की चिंता थोड़ी कम हो जाएगी। पहली बार लग रहा है कि सरकार हमारी भी सुन रही है।”

झज्जर की गायत्री, जो विधवा हैं, कहती हैं। कि “यह सिर्फ पैसा नहीं है, आत्मविश्वास है। अब मैं अपने खर्च खुद उठा सकती हूँ।”

चुनौतियाँ भी हैं।

योजना की लोकप्रियता के साथ-साथ कुछ जिलों में फर्जीवाड़े के प्रयास भी सामने आए हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि महिलाएँ केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट पर ही भरोसा करें।

इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में डिजिटल साक्षरता की कमी और दस्तावेज़ सत्यापन की धीमी गति, इस योजना की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।

निष्कर्ष।

लाडो लक्ष्मी योजना, हरियाणा की महिलाओं के जीवन में उम्मीद का नया सूरज लेकर आई है।
यह सिर्फ ₹2,100 की राशि नहीं — बल्कि एक महिला के सपनों, उसकी गरिमा और आत्मनिर्भरता की कीमत है।

अगर सरकार पारदर्शिता और सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित करती है, तो आने वाले वर्षों में यह योजना हरियाणा मॉडल बन सकती है —
जहाँ हर “लाडो” अपने भविष्य की लक्ष्मी खुद बनेगी।

लहर हिंदी ब्लॉग: “जहाँ गाँव की आवाज़ बनती है बदलाव की कहानी।”