बिहार की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और अंतिम मतदाता सूची

लहर डेस्क
बिहार में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का आयोजन 22 साल बाद हुआ। यह एक महत्वपूर्ण और विवादास्पद प्रक्रिया रही, जिसका उद्देश्य था मतदाता सूची को शुद्ध करना और उसे अपडेट करना ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई भी अपात्र व्यक्ति शामिल न हो। यह कार्य संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के अंतर्गत आयोग के दायित्व के तहत किया गया। सितंबर 2025 के अंत में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन आगामी बिहार विधानसभा चुनावों के लिए एक निर्णायक कदम साबित हुआ।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?
SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा किया जाने वाला एक व्यापक और गहन अभ्यास है, जिसके तहत मौजूदा मतदाता सूची का पुनरीक्षण और शुद्धिकरण किया जाता है। बिहार में पिछली बार ऐसा गहन पुनरीक्षण 2003 में हुआ था।
बिहार SIR की मुख्य बातें।

- उद्देश्य: मृतक, स्थायी रूप से प्रवास कर चुके या दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाना और उन नए पात्र नागरिकों को शामिल करना जिन्होंने 1 जुलाई 2025 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली।
- प्रक्रिया: इसमें बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया गया। साथ ही नए नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6, गलत नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 और सुधार के लिए फॉर्म 8 आमंत्रित किए गए।
- विवाद और सुधार।
- 24 जून 2025 को ECI के आदेश ने विवाद खड़ा किया। इसमें कहा गया कि जो मतदाता 2003 की मतदाता सूची में नहीं थे (लगभग 2.93 करोड़ लोग), उन्हें अपनी पात्रता साबित करने के लिए 11 खास दस्तावेजों में से एक देना होगा। इनमें आधार, राशन कार्ड और यहां तक कि मतदाता पहचान पत्र (EPIC) भी मान्य नहीं था।
- आलोचकों ने इसे नागरिकता-जांच जैसा बताया और कहा कि इससे गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों का नाम सूची से हट सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और आलोचना के बाद, चुनाव आयोग ने सुधार किया। आयोग ने निर्देश दिया कि जहाँ तक संभव हो, मतदाताओं को 2003 की सूची से उनके पारिवारिक संबंधों के आधार पर भी जोड़ा जाए, ताकि बहुत कम लोगों को दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की नौबत आए।
अंतिम मतदाता सूची और प्रमुख आँकड़े।

30 सितंबर 2025 को ECI ने बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की, जो SIR प्रक्रिया के सफल समापन पर आधारित थी। यही सूची आगामी विधानसभा चुनावों की आधार सूची होगी।
| मानक | संख्या | प्री-SIR सूची से बदलाव |
|---|---|---|
| SIR से पहले मतदाता (24 जून 2025) | 7.89 करोड़ | – |
| ड्राफ्ट सूची (1 अगस्त 2025) | 7.24 करोड़ | 65 लाख नाम हटाए गए |
| अंतिम सूची (30 सितम्बर 2025) | 7.42 करोड़ | लगभग 47 लाख (6%) की कमी |
| ड्राफ्ट सूची से हटाए गए अपात्र मतदाता | 3.66 लाख | – |
| ड्राफ्ट सूची में जोड़े गए पात्र मतदाता (फॉर्म 6) | 21.53 लाख | – |
अंतिम आँकड़ों का विश्लेषण।
- कुल कमी: 21 लाख से अधिक नए मतदाताओं के जुड़ने के बावजूद, अंतिम सूची 7.42 करोड़ पर आकर रुकी, जो प्रारंभिक 7.89 करोड़ मतदाताओं से लगभग 47 लाख (6%) कम है।
- हटाए गए नाम: 65 लाख मतदाताओं के नाम शुरू में हटाए गए, जिनमें मृत्यु, स्थायी प्रवास और डुप्लीकेट नाम जैसी सामान्य परिस्थितियाँ शामिल थीं।
- जोड़े गए नाम: 21.53 लाख नए मतदाताओं को फॉर्म 6 के ज़रिए दावे और आपत्तियों की अवधि (1 सितम्बर 2025 तक) में शामिल किया गया। इसने शुरुआती बड़ी गिरावट को कुछ हद तक संतुलित किया।
अपना नाम कैसे जाँचें?

अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम जाँचने के लिए नागरिक निम्नलिखित तरीकों का उपयोग कर सकते हैं:
- ऑनलाइन: ECI या CEO बिहार की आधिकारिक वेबसाइटों (electoralsearch.eci.gov.in या voters.eci.gov.in) पर जाकर नाम/व्यक्तिगत विवरण या EPIC नंबर से खोज सकते हैं।
- भौतिक प्रतियाँ: अंतिम सूची जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) के कार्यालयों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाती है।
अगर नाम सूची से गायब है तो क्या करें?
यदि किसी पात्र नागरिक का नाम अंतिम मतदाता सूची में भी नहीं है, तो वह ये कदम उठा सकता है:
- नाम जोड़ने के लिए आवेदन: फॉर्म 6 के माध्यम से नया आवेदन किया जा सकता है। ECI के नियमों के अनुसार चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि से 10 दिन पहले तक आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। ये नाम बाद में प्रकाशित होने वाली पूरक सूची में जोड़े जाते हैं।
- अपील का अधिकार: यदि ERO द्वारा लिए गए निर्णय से व्यक्ति असंतुष्ट है, तो वह पहली अपील जिला मजिस्ट्रेट के पास और दूसरी अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) बिहार के पास कर सकता है। यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के अंतर्गत है।
बिहार की मतदाता सूची का यह विशेष गहन पुनरीक्षण एक विशाल प्रशासनिक अभ्यास था। इसके जरिए मतदाता सूची को अद्यतन किया गया, ताकि आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक अधिक सटीक और विश्वसनीय आधार तैयार हो सके।