भारत–श्रीलंका भिड़ंत की वो रात, जब दुबई थम गया था।

लहर डेस्क / अनीस आर खान

दुबई, 26 सितंबर 2025
कभी–कभी क्रिकेट महज़ एक खेल से कहीं अधिक हो जाता है। वह एक उत्सव बन जाता है, भावनाओं का समुद्र, उम्मीदों का पहाड़ और दिल की धड़कनों का अखाड़ा। एशिया कप के सुपर फोर चरण में भारत और श्रीलंका के बीच हुआ यह मुकाबला ठीक वैसा ही था। 20–20 ओवर के बाद भी जब विजेता तय नहीं हो सका और नतीजा सुपर ओवर पर जा पहुँचा, तो दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में बैठे हजारों दर्शकों के लिए यह मैच जीवन भर याद रहने वाला अनुभव बन गया।

स्टेडियम का रंग और दर्शकों की धड़कनें।

शाम ढलते ही दुबई का आसमान रोशनी से जगमगा उठा। जैसे ही दोनों टीमों के खिलाड़ी मैदान पर उतरे, दर्शकों का शोर किसी तूफान की तरह गूंज उठा। गैलरी में भारतीय तिरंगे की लहराती कतारें और श्रीलंका के नीले झंडे आपस में जैसे संवाद कर रहे थे।

स्टेडियम के बाहर से ही स्पष्ट था कि यह महज़ एक सुपर फोर मैच नहीं, बल्कि एशिया कप फाइनल का ड्रेस रिहर्सल है। दर्शक इस मुकाबले को भविष्य के भारत–पाकिस्तान फाइनल की भूमिका के रूप में देख रहे थे।

एक भारतीय परिवार, जो जयपुर से उड़ान भरकर खास इस मैच के लिए आया था, हाथ में डफली बजाते हुए नारे लगा रहा था “जीतेगा भाई जीतेगा, इंडिया जीतेगा!” वहीं, श्रीलंकाई समर्थक ड्रम और ढोल पर पारंपरिक गीत गाकर अपनी टीम का हौसला बढ़ा रहे थे।

भारत की तूफानी शुरुआत।

टॉस जीतकर भारत ने बल्लेबाज़ी चुनी और मानो जैसे बिजली गिरा दी हो। ओपनर अभिषेक शर्मा ने गेंदबाज़ों पर धावा बोलते हुए मात्र 31 गेंदों पर 61 रन जड़ दिए। हर छक्का गैलरी में बैठे बच्चों के लिए आतिशबाज़ी जैसा था। दर्शक अपनी सीटों से उठकर “अभिषेक-अभिषेक” के नारे लगाने लगे।

उनके बाद संजू सैमसन ने 39 रन जोड़े और तिलक वर्मा ने संभलकर बल्लेबाज़ी करते हुए नाबाद 49 रन बनाए। जब स्कोरबोर्ड 200 के पार पहुँचा तो भारतीय प्रशंसकों ने मानो जीत की घोषणा कर दी। लेकिन खेल अभी बाकी था।

निसंका की शतकीय गूंज।

श्रीलंका की पारी में एक नाम ऐसा था जिसने दुबई की रात को अपना बना लिया – पथुम निसंका। भले ही कुसल मेंडिस जल्दी आउट हो गए, लेकिन निसंका और कुसल परेरा ने मिलकर खेल को नए रंग में रंग दिया। परेरा ने 32 गेंदों पर 58 रन ठोककर भारतीय गेंदबाज़ों के पसीने छुड़ा दिए।

निसंका की बल्लेबाज़ी तो मानो कविता थी। उनके हर स्ट्रोक पर श्रीलंकाई दर्शक झूम उठते। वह 58 गेंदों पर 107 रन बना गए, जिसमें सात चौके और छह छक्के शामिल थे। जब उन्होंने अपना पहला टी-20 अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा किया, तो पूरा स्टेडियम खड़ा होकर तालियाँ बजाने लगा।

आख़िरी ओवर का नाटक।

मैच अपने चरम पर था। श्रीलंका को आखिरी ओवर में 12 रन चाहिए थे। दर्शकों की साँसें थम गईं। भारत के डगआउट में कोच और खिलाड़ी बेचैनी से खड़े थे।

पहली चार गेंदों में श्रीलंका ने 9 रन बना लिए। अब समीकरण था—दो गेंदों पर 3 रन। कैमरे में एक भारतीय प्रशंसक दिखा, जिसने अपनी हथेलियों को जोड़कर आँखें बंद कर लीं।

आखिरी गेंद पर श्रीलंका को जीत के लिए 3 रन चाहिए थे। दासुन शनाका ने गेंद खेली और भागते हुए सिर्फ 2 रन ले पाए। स्टेडियम में ऐसा शोर गूंजा कि कानों में सीटी बजने लगी। मुकाबला बराबरी पर खत्म हुआ—202 बनाम 202।

सुपर ओवर का रोमांच।

अब बारी थी क्रिकेट के सबसे रोमांचक अध्याय की—सुपर ओवर। गैलरी में बैठे दर्शक खड़े हो गए। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाज़ी की। सामने थे अर्शदीप सिंह। युवा तेज़ गेंदबाज़ ने जो किया, उसने इतिहास रच दिया।

सिर्फ छह गेंदों में अर्शदीप ने दो विकेट चटकाए और महज़ 2 रन दिए। भारतीय दर्शक उछल पड़े। कुछ ने फोन पर वीडियो कॉल करके अपने रिश्तेदारों को लाइव दिखाया।

भारत को जीत के लिए केवल 3 रन चाहिए थे। कप्तान सूर्यकुमार यादव स्ट्राइक पर थे। जैसे ही पहली गेंद खेली गई और चौका निकला, पूरा स्टेडियम “भारत माता की जय” के नारों से गूंज उठा। श्रीलंकाई दर्शक निराश थे, लेकिन निसंका के शतक ने उन्हें गर्व का पल भी दिया था।

मैदान से बाहर की कहानियाँ।

मैच खत्म होते ही स्टेडियम के बाहर का नज़ारा किसी मेले से कम नहीं था। बच्चे झंडे लहराते, लोग फोटो खिंचवाते और सोशल मीडिया पर लाइव जाते नज़र आए। एक बुजुर्ग श्रीलंकाई प्रशंसक ने कहा कि “निसंका ने भले ही मैच नहीं जिताया, लेकिन उसने हमारी उम्मीदों को नई ऊँचाई दी है।”

वहीं एक भारतीय प्रशंसक ने कहा कि “ये जीत पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल से पहले हमारी हिम्मत और बढ़ाएगी। सुपर ओवर में जीत का मतलब है—टीम का आत्मविश्वास आसमान पर है।”

मैच का अर्थ और आगे की राह।

यह मुकाबला अंक तालिका पर भले असरदार न था—क्योंकि भारत पहले ही फाइनल में पहुँच चुका था—लेकिन यह टीम इंडिया के लिए दबाव झेलने की परीक्षा थी। सुपर ओवर में जीत ने बता दिया कि यह युवा टीम बड़े मौकों पर घबराती नहीं।

पथुम निसंका को उनकी शानदार पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। यह एक दुर्लभ दृश्य था—जहाँ मैन ऑफ द मैच विजेता टीम से नहीं, बल्कि हारने वाली टीम से गया।

दर्शकों के लिए एक अमिट स्मृति।

यह रात दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए दर्ज हो गई। भारत और श्रीलंका का यह मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट की जादुई ताक़त का प्रमाण था—जहाँ हार–जीत से परे, लोग खेल के जुनून और जज़्बे में डूब जाते हैं।

दुबई की उस रोशन रात में, जब आसमान पर आतिशबाज़ी चमक रही थी और स्टेडियम में गूंजते नारों के बीच भारतीय खिलाड़ी जीत का जश्न मना रहे थे, हर दर्शक ने यही सोचा—“हमने आज क्रिकेट का असली रोमांच देखा।”