हैदराबादी बिरयानी की कहानी।

फोज़िया रहमान खान, नई दिल्ली

धुंधली-सी शाम थी। हैदराबाद के पुराने शहर की तंग गलियों में चलते ही हवा में अचानक एक अनोखी महक घुल गई। इलायची, केसर, घी और पकते चावल की मिली-जुली खुशबू। लोग अपने कदम रोककर इधर-उधर देखने लगे, मानो यह जादुई महक उन्हें किसी अदृश्य दरवाज़े की ओर बुला रही हो। यह था हैदराबादी बिरयानी का असर, एक ऐसा व्यंजन, जिसकी खुशबू दिल जीत लेती है और जिसकी कहानी इतिहास की परतों में छिपी है।

निज़ामों के दौर से आज तक।

हैदराबादी बिरयानी का इतिहास 17वीं शताब्दी से जुड़ा है। जब मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने आसफ़ जाह प्रथम को दक्कन का सूबेदार बनाया, तभी से निज़ामों की रसोई में फारसी और तुर्की खानपान का मेल दक्कनी और तेलुगु स्वादों से हुआ। इसी संगम से जन्मी है हैदराबादी बिरयानी। कहा जाता है कि निज़ाम की शाही दावतों में बिरयानी का कोई न कोई रूप ज़रूर शामिल होता था। दरबार की मेहफ़िलें इसी के बिना अधूरी मानी जातीं। यह सिर्फ़ खाना नहीं था, बल्कि शाही ठाठ-बाट और मेहमाननवाज़ी का प्रतीक था।

निज़ामों की रसोई के किस्से।

हैदराबाद के सातवें निज़ाम, मीर उस्मान अली ख़ान, खाने-पीने के बड़े शौक़ीन माने जाते थे। शाही बावर्चियों की टोली हर दावत के लिए अलग-अलग बिरयानियाँ बनाती थी।

त्यौहारों की बिरयानी: रमज़ान और ईद पर कच्ची गोश्त की बिरयानी ही शाही मेज़ पर सजती थी। इसमें बकरे का कोमल मांस दही और मसालों में रातभर मैरीनेट होता और फिर दम पर पकता।

सैनिकों की बिरयानी: जब सेना लंबे सफ़र पर निकलती, तो रसोई में बड़ी देगचियों में बिरयानी पकाई जाती। क्योंकि यह पौष्टिक थी और लंबे समय तक ख़राब नहीं होती थी।

खास मेहमानों के लिए: कहा जाता है कि निज़ाम की रसोई में 49 तरह की बिरयानियाँ बनाई जाती थीं। इनमें ज़ाफ़रानी बिरयानी, ताहिरी, और यहां तक कि मछली व झींगा बिरयानी भी शामिल थी।

एक मशहूर किस्सा यह है कि एक दावत में शाही बावर्ची ने दम पर रखा बर्तन समय पर नहीं खोला। डर था कि बिरयानी जल गई होगी। लेकिन जब ढक्कन हटा, तो स्वाद और खुशबू इतनी लाजवाब थी कि उसी दिन से दम विधि बिरयानी की पहचान बन गई।

दम का जादू।

हैदराबादी बिरयानी का असली जादू है दम। चावल और मैरीनेट किया हुआ मांस परत-दर-परत सजाया जाता है और बर्तन को आटे से सील कर धीमी आँच पर पकाया जाता है। जब दम खुलता है, तो हर दाना महकता है और हर कौर शाही स्वाद का अहसास कराता है।

असली स्वाद का राज़।

हैदराबादी बिरयानी का दिल है इसका मसाला। बाज़ार से मसाला लिया जा सकता है, लेकिन असली स्वाद घर पर बने मसाले से ही आता है।

सामग्री (होममेड बिरयानी मसाला)

धनिया बीज – 2 बड़े चम्मच

जीरा – 1 बड़ा चम्मच

शाही जीरा – 1 छोटा चम्मच

लौंग – 8-10

हरी इलायची – 6-7

बड़ी इलायची – 2

दालचीनी – 3-4 छोटे टुकड़े

तेजपत्ता – 2

जायफल – ½ (कद्दूकस किया हुआ)

जावित्री – 2 टुकड़े

काली मिर्च – 1 छोटा चम्मच

सूखी लाल मिर्च – 3-4

स्टार ऐनीज़ – 1

विधि।

सभी मसालों को हल्की आँच पर 2-3 मिनट सूखा भून लें।

ठंडा होने पर इन्हें मिक्सर में बारीक पीस लें।

एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखें। यह मसाला महीनों तक सुरक्षित रहता है।

यही मसाला बिरयानी के हर कौर को निज़ामों की दावत जैसा बना देता है।

बिरयानी के दो रूप।

कच्ची बिरयानी: मैरीनेट किया हुआ कच्चा मांस सीधे चावल के साथ दम पर पकाया जाता है। यह सबसे प्रामाणिक और स्वादिष्ट मानी जाती है।

पक्की बिरयानी: इसमें मांस पहले आधा पकाया जाता है और फिर चावल के साथ दम पर लगाया जाता है।

प्रामाणिक रेसिपी (कच्ची चिकन बिरयानी)

मैरीनेशन: चिकन को दही, अदरक-लहसुन पेस्ट, मिर्च, बिरयानी मसाला, नींबू, प्याज और पुदीना-धनिया के साथ 6 घंटे तक रख दें।

चावल: बासमती चावल को खड़े मसालों वाले पानी में 70-80% तक उबालें और छान लें।

दम विधि: भारी बर्तन में चिकन की परत, फिर चावल की परत। ऊपर से केसर दूध, तली प्याज और घी। आटे से सील करें और धीमी आँच पर 25 मिनट दम दें।

परोसना: दम खुलने के बाद बिरयानी को हल्के हाथ से मिलाएँ और रायते, मीरची का सालन और सलाद के साथ परोसें।

हैदराबादी बिरयानी क्यों है अलग?

भारत में लखनवी, मुरादाबादी, कोलकाता और मलाबार जैसी कई बिरयानियाँ मिलती हैं, लेकिन हैदराबादी बिरयानी अपनी दम विधि, तेज मसालों, और परत-दर-परत पकाने की शैली की वजह से सबसे अलग है। इसमें मसालों की गहराई, चावल की खुशबू और मांस की नरमी एक साथ मिलती है, जो इसे शाही और अद्वितीय बनाती है।

पाठकों से सवाल।

प्रिय पाठक,

1 : क्या आपने कभी हैदराबादी बिरयानी को घर पर बनाने की कोशिश की है?

2 : आपके शहर या परिवार में बिरयानी का कौन-सा रूप सबसे लोकप्रिय है?

3 : क्या आप मानते हैं कि असली स्वाद हमेशा घर के बने बिरयानी मसाले में छिपा होता है?

आपके अनुभव और विचार इस कहानी को और समृद्ध बना सकते हैं।